टोक्यो में आयोजित ऐति हासिक समारोह में अकिहितो ने सम्राट के तौर पर जनता को आखिरी बार संबोधित किया. जापान के शाही घ राने के 200 साल के इतिहास में ऐसा करने वाले वो पहले राजा हैं. राजगद्दी छोड़ने की प्रक्रिया शाही महल में कई निजी रीति रिवाजों के साथ शुरू हुई. 85 साल के सम्राट को अपनी गद्दी छोड़ने के लि ए बाक़ायदा क़ानून बनाकर इजाज़त दी गई क्योंकि सम्राट अकिहितो ने अपनी बढ़ती उम्र और गिरती सेहत के कारण अपनी ज़िम्मेदारियों का ठीक से निर्वाह करने में असमर्थता जताई थी. सम्राट अकिहीतो के बेटे युवराज नारोहितो बुधवा र को राजगद्दी पर बैठेंगे. जापान में राजा के पास कोई राजनीतिक शक्ति नहीं होती है लेकिन वो एक राष्ट्रीय प्रतीक के तौर पर देखे जाते हैं. राजगद्दी छोड़ने की प्रक्रिया में सम्राट अकि हितो ने राजगद्दी छोड़ने की जानकारी सब से पहले राजघराने के कथित कुलदेवता और अपने पूर्वजों को सांकेतिक तौर पर दी. उसके बाद गद्दी छोड़ने की आधिका रिक प्रक्रिया शाही महल में होगी. स्थानीय समयानुसार शाम पांच बजे (भारत में दिन के साढ़े 12 बजे) सम्राट अकिहितो और महारानी मिशि को शाही महल में आएंगे और य...