राजनीति या सत्ता के साथ झाँसा शब्द कुछ इस क़दर जुड़ा है कि नेता एक दूसरे पर झाँसेबाज़ी का आरोप लगाते रहे
हैं. अब बात इतनी बढ़ गई है कि पार्टियाँ भी आधिकारिक तौर पर जनहित में कही गई बातों को झाँसा बताने लगी हैं.
कुछ दिनों पहले 2019 चुनावों के लिए कांग्रेस ने घोषणापत्र जारी किया तो भारतीय जनता पार्टी ने उसे
झाँसा-पत्र कहकर ख़ारिज कर दिया. बस, फिर देर क्या थी. जैसे ही भाजपा ने
दूसरी बार सत्ता में आने के लिए अपने पिटारे से चुनावी वादों की फुलझड़ी
चलाई, काँग्रेस ने भी इसे झाँसा-पत्र घोषित करने में देर नहीं लगाई. किसी के साथ धोखाधड़ी करने के लिए झाँसा शब्द बोलचाल की हिंदी में ख़ूब प्रचलित है. भाषाविदों के मुताबिक़ इसका रिश्ता संस्कृत के 'अध्यास' से है. हरगोविंद दास त्रिकमचंद सेठ के 'पाइय सद्द महण्णवो' में अध्यास का प्राकृत रूप अज्झास बताया गया है.
झाँसा इसी से बना है. अक्सर 'ध' और 'य' मिलकर 'झ' का रूप लेते हैं जैसा कि उपाध्याय में ओझा और फिर झा में नज़र आता है. यही चीज़ झाँसा के प्राकृत रूप अज्झास और संस्कृत रूप अध्यास में दिख रही है.
संस्कृत अध्यास में आसन, स्थान, ऊपर बैठना. अधिकार में करना जैसे भावों के साथ मिथ्या-आरोपण या मिथ्याज्ञान जैसे आशय भी हैं. यह बना है आसन वाले आस में 'अधि' जुड़ने से जिसका इस्तेमाल अनेक शब्दों में देखते हैं जैसे अधिकार, अधिनायक आदि.
इसमें ऊपर, बढ़त, उँचाई, बहुत या पार की बात है जो श्रेष्ठता तक जाती है. कुल मिलाकर, 'अधि' में अधिकाई का भाव है. अधिकता की बात है. जब कुर्सी की बात हो तो अधिकाई सत्तामद तक तो पहुँचेगी ही.
आसन में जो 'आस्' है उसके कई अर्थ हैं, जिनमें बैठना, लेटना, रहना, वास करना आसीन होना भी है और झूठ, बनावट, भ्रांत, सफेद झूठ, चालबाज़ी या कपट जैसी बात भी. इसी के साथ 'आस का एक अर्थ है "बिना किसी रुकावट के कुछ भी करना."
आसन शब्द इसी धातु से निकला है जिसका अर्थ है बैठना, बैठने का स्थान, कुर्सी, सिंहासन, आसंदी वगैरह. आसन का मतलब सिर्फ़ बैठने की जगह भर नहीं बल्कि इसमें 'पद के अनुरूप स्थान' का भाव भी है.
आसन अपने आप में बुद्धि और प्रतिष्ठा से जुड़ा है. किन्तु 'आस' के साथ जब आगे, ऊपर के आशय वाला 'अधि' जुड़ता है तो 'अध्यास' बनता है और इस तरह अर्थ हुआ ऊपर बैठना. ग़ौर करें इसमें हावी होने, चढ़ने का भाव है यानी बात बढ़ जाती है. ऊँचाई का अकड़ से रिश्ता यूँ ही नहीं है.
इस तरह अध्यास 'मिथ्याभाव' भी आ जाता है अर्थात योग्यता न होने पर भी उसका दिखावा करना. आसन यानी कुर्सी के लायक़ न होने पर भी अपना रौब जताना. एक झूठी छवि प्रस्तुत करना.
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