एक अन्य ग्रामीण लाली देवी के मुताबिक़ मुर्गी गांव में एक महिला ओझा (जिसका नाम किसी भी ग्रामीण ने नहीं बताया) ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि किसी के घर के आगे सूखा पीपल, का पेड़ है, वही गांव को तबाह कर रहा है. बीते माह और पूर्व में गांव में हुई मौत के लिए इन् हीं लोगों को जिम्मेदार ठहराया. बुढ़मू के स्थानीय पत्रकार रंगनाथ बातते हैं कि आसपास के इलाक़ों में पहले भी डायन के आरोप में हत्याएं हुई है. उसमें भी मुर्गी गांव के ओझा का नाम ही सामने आता रहा है. वहीं डायन कुप्रथा उन्मूलन को लेकर पिछले 30 सालों से काम कर रहे आशा नामक एनजीओ के सचिव अजय कुमार जायसवाल ने बताया कि उनलोगों ने साल 2015 में झारखंड के आठ ज़िलों के 332 पंचायत में सर्वे किया था. इसमें 76 ओझा चिन्हित किए गए थे. उनके मुताबिक़, इनको ऐसी महिलाओं ने चिन्हित किया था जिन्हें डायन कहा जा रहा था. ऐसी महिलाओं की संख्या 256 थी. ये सभी झारखंड के सरायकेला, बोकारो, रांची, खूंटी, गुमला, लोहरदगा जिलों से थीं. सिसकारी गांव में मृतक फगनी देवी की बहु बुधन देवी (32) हाल-चाल लेने आए मेहमानों के लिए चावल और साग बना रही थीं. बातचीत के...