नेशनल लॉ स्कूल की रिपोर्ट के मुताबिक बाल यौन शोषण के अपराधों में अपराधियों के छूट जाने की दर काफ़ी ज़्यादा है.
वहीं इंडियन एक्सप्रेस ने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली के एक प्रोजेक्ट 39A के तहत तैयार किए गए 'डेथ पेनाल्टी इन इंडिया: एनुअल स्टेटिस्टिक्स रिपोर्ट 2018' के हवाले से लिखा है कि बच्चों के साथ रेप के मामलों में सख़्त क़ानून बनने के बाद से बीते बीस सालों में मृत्यदंड की सज़ा सुनाए जाने के फ़ैसलों में बहुत इज़ाफ़ा हुआ है.
हालांकि बीते साल सुप्रीम कोर्ट ने मृत्यदंड के 12 मामलों की सुनवाई करते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सज़ा में तब्दील कर दिया था.
अभियुक्त महेंद्र भी इन्हीं मामलों का हवाला देते हुए कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में या तो स्टे लगा देगा या फिर फांसी की सज़ा को कारावास में बदल देगा.
चार साल की रेप पीड़िता के वकील ब्रह्मदत्त का कहना है कि इस मामले में सबकुछ बहुत स्पष्ट है और तभी इस मामले में इतनी जल्दी फ़ैसला भी आ गया है.
वो कहते हैं "जब बच्ची की मेडिकल जांच हुई तो साफ़ हो गया कि महेंद्र ने ही बच्ची के साथ रेप किया है. डीएनए रिपोर्ट में भी स्पष्ट है कि महेंद्र ने बच्चे के साथ यौन-दुराचार किया. रेप के मामलों में सबसे बड़ा साक्ष्य यही होता है और बाद में बच्ची ने भी बयान दे दिया तो शक की कोई गुंजाइश रह नहीं जाती है."
ब्रह्मदत्त बताते हैं कि दोषी सतना ज़िले के परसमनिया गांव में ही अध्यापक था. 30 जून 2018 की रात को क़रीब 10 बजे वो बच्ची के घर आया था लेकिन पहली बार वो बच्ची के पिता से मिलकर लौट गया. फिर उसके कुछ देर बाद वो वहां दोबारा पहुंचा.
वो कहते हैं "कुछ देर बाद ही वो दोबारा बच्ची के घर गया. उस वक़्त बच्ची के पिता टॉयलेट के लिए गए हुए थे और बच्ची आंगन में खाट पर अकेले सो रही थी. उसने बच्ची को उठाया और उसे अपने साथ पास ही के एक खाली मैदान में लेता गया. जहां उसने उसके साथ रेप किया और बुरी तरह से घायल हालत में छोड़कर चला गया."
"कुछ देर बाद जब बच्ची के पिता लौटे तो बच्ची को घर पर नहीं पाकर उसे खोजने में जुट गए. अगली सुबह कहीं जाकर बच्ची उन्हें मिली. उसकी अंडरगार्मेंट नहीं थी और उसके कपड़े पर खून लगा था."
ब्रह्मदत्त कहते हैं कि बच्ची की हालत बहुत ख़राब थी. उसके जननांगों से खून आ रहा था. जिसके बाद उसे सतना के ही एक अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन बाद में डॉक्टरों की सलाह पर उसे दिल्ली स्थित एम्स भेज दिया गया.
ब्रह्मदत्त ने बताया कि बच्ची की हालत पहले से बेहतर है लेकिन जो हुआ उससे पूरा परिवार मानसिक तनाव से गुज़रा. लेकिन वो क़ानूनी व्यवस्था की सराहना भी करते हैं जिसकी वजह से इस मामले में इतनी जल्दी फ़ैसला आया.
"साल 2018 में अलग-अलग ट्रायल कोर्ट ने 162 मामलों में मृत्युदंड की सज़ा सुनाई. जिसमें से 22 मामले सिर्फ़ मध्य प्रदेश में सुनाए गए. इन 22 मामलों में 7 मामले 12 साल से कम उम्र के बच्चों के साथ हुए रेप से जुड़े हैं"
वहीं इंडियन एक्सप्रेस ने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली के एक प्रोजेक्ट 39A के तहत तैयार किए गए 'डेथ पेनाल्टी इन इंडिया: एनुअल स्टेटिस्टिक्स रिपोर्ट 2018' के हवाले से लिखा है कि बच्चों के साथ रेप के मामलों में सख़्त क़ानून बनने के बाद से बीते बीस सालों में मृत्यदंड की सज़ा सुनाए जाने के फ़ैसलों में बहुत इज़ाफ़ा हुआ है.
हालांकि बीते साल सुप्रीम कोर्ट ने मृत्यदंड के 12 मामलों की सुनवाई करते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सज़ा में तब्दील कर दिया था.
अभियुक्त महेंद्र भी इन्हीं मामलों का हवाला देते हुए कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में या तो स्टे लगा देगा या फिर फांसी की सज़ा को कारावास में बदल देगा.
चार साल की रेप पीड़िता के वकील ब्रह्मदत्त का कहना है कि इस मामले में सबकुछ बहुत स्पष्ट है और तभी इस मामले में इतनी जल्दी फ़ैसला भी आ गया है.
वो कहते हैं "जब बच्ची की मेडिकल जांच हुई तो साफ़ हो गया कि महेंद्र ने ही बच्ची के साथ रेप किया है. डीएनए रिपोर्ट में भी स्पष्ट है कि महेंद्र ने बच्चे के साथ यौन-दुराचार किया. रेप के मामलों में सबसे बड़ा साक्ष्य यही होता है और बाद में बच्ची ने भी बयान दे दिया तो शक की कोई गुंजाइश रह नहीं जाती है."
ब्रह्मदत्त बताते हैं कि दोषी सतना ज़िले के परसमनिया गांव में ही अध्यापक था. 30 जून 2018 की रात को क़रीब 10 बजे वो बच्ची के घर आया था लेकिन पहली बार वो बच्ची के पिता से मिलकर लौट गया. फिर उसके कुछ देर बाद वो वहां दोबारा पहुंचा.
वो कहते हैं "कुछ देर बाद ही वो दोबारा बच्ची के घर गया. उस वक़्त बच्ची के पिता टॉयलेट के लिए गए हुए थे और बच्ची आंगन में खाट पर अकेले सो रही थी. उसने बच्ची को उठाया और उसे अपने साथ पास ही के एक खाली मैदान में लेता गया. जहां उसने उसके साथ रेप किया और बुरी तरह से घायल हालत में छोड़कर चला गया."
"कुछ देर बाद जब बच्ची के पिता लौटे तो बच्ची को घर पर नहीं पाकर उसे खोजने में जुट गए. अगली सुबह कहीं जाकर बच्ची उन्हें मिली. उसकी अंडरगार्मेंट नहीं थी और उसके कपड़े पर खून लगा था."
ब्रह्मदत्त कहते हैं कि बच्ची की हालत बहुत ख़राब थी. उसके जननांगों से खून आ रहा था. जिसके बाद उसे सतना के ही एक अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन बाद में डॉक्टरों की सलाह पर उसे दिल्ली स्थित एम्स भेज दिया गया.
ब्रह्मदत्त ने बताया कि बच्ची की हालत पहले से बेहतर है लेकिन जो हुआ उससे पूरा परिवार मानसिक तनाव से गुज़रा. लेकिन वो क़ानूनी व्यवस्था की सराहना भी करते हैं जिसकी वजह से इस मामले में इतनी जल्दी फ़ैसला आया.
"साल 2018 में अलग-अलग ट्रायल कोर्ट ने 162 मामलों में मृत्युदंड की सज़ा सुनाई. जिसमें से 22 मामले सिर्फ़ मध्य प्रदेश में सुनाए गए. इन 22 मामलों में 7 मामले 12 साल से कम उम्र के बच्चों के साथ हुए रेप से जुड़े हैं"
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